Powered by Blogger.
  • Home
  • Thrill of the chaste: The truth about Gandhi's sex life



    It was no secret that Mohandas Gandhi had an unusual sex life. He spoke constantly of sex and gave detailed, often provocative, instructions to his followers as to how to they might best observe chastity. And his views were not always popular; "abnormal and unnatural" was how the first Prime Minister of independent India, Jawaharlal Nehru, described Gandhi's advice to newlyweds to stay celibate for the sake of their souls.

    But was there something more complex than a pious plea for chastity at play in Gandhi's beliefs, preachings and even his unusual personal practices (which included, alongside his famed chastity, sleeping naked next to nubile, naked women to test his restraint)? In the course of researching my new book on Gandhi, going through a hundred volumes of his complete works and many tomes of eye-witness material, details became apparent which add up to a more bizarre sexual history.

    Much of this material was known during his lifetime, but was distorted or suppressed after his death during the process of elevating Gandhi into the "Father of the Nation" Was the Mahatma, in fact, as the pre-independence prime minister of the Indian state of Travancore called him, "a most dangerous, semi-repressed sex maniac"?

    Gandhi was born in the Indian state of Gujarat and married at 13 in 1883; his wife Kasturba was 14, not early by the standards of Gujarat at that time. The young couple had a normal sex life, sharing a bed in a separate room in his family home, and Kasturba was soon pregnant.

    Two years later, as his father lay dying, Gandhi left his bedside to have sex with Kasturba. Meanwhile, his father drew his last breath. The young man compounded his grief with guilt that he had not been present, and represented his subsequent revulsion towards "lustful love" as being related to his father's death.

    However, Gandhi and Kasturba's last child wasn't born until fifteen years later, in 1900.

    In fact, Gandhi did not develop his censorious attitude to sex (and certainly not to marital sex) until he was in his 30s, while a volunteer in the ambulance corps, assisting the British Empire in its wars in Southern Africa. On long marches in sparsely populated land in the Boer War and the Zulu uprisings, Gandhi considered how he could best "give service" to humanity and decided it must be by embracing poverty and chastity.

    At the age of 38, in 1906, he took a vow of brahmacharya, which meant living a spiritual life but is normally referred to as chastity, without which such a life is deemed impossible by Hindus.

    Gandhi found it easy to embrace poverty. It was chastity that eluded him. So he worked out a series of complex rules which meant he could say he was chaste while still engaging in the most explicit sexual conversation, letters and behaviour.

    With the zeal of the convert, within a year of his vow, he told readers of his newspaper Indian Opinion: "It is the duty of every thoughtful Indian not to marry. In case he is helpless in regard to marriage, he should abstain from sexual intercourse with his wife."

    Meanwhile, Gandhi was challenging that abstinence in his own way. He set up ashrams in which he began his first "experiments" with sex; boys and girls were to bathe and sleep together, chastely, but were punished for any sexual talk. Men and women were segregated, and Gandhi's advice was that husbands should not be alone with their wives, and, when they felt passion, should take a cold bath.

    The rules did not, however, apply to him. Sushila Nayar, the attractive sister of Gandhi's secretary, also his personal physician, attended Gandhi from girlhood. She used to sleep and bathe with Gandhi. When challenged, he explained how he ensured decency was not offended. "While she is bathing I keep my eyes tightly shut," he said, "I do not know ... whether she bathes naked or with her underwear on. I can tell from the sound that she uses soap." The provision of such personal services to Gandhi was a much sought-after sign of his favour and aroused jealousy among the ashram inmates.

    अवसाद से गर्भपात का कोई संबंध नहीं

    अमेरिका के वैज्ञानिकों ने नए शोध में दावा किया है कि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि गर्भपात के बाद महिलाओं को मानसिक अवसाद होता ही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस विषय पर आज तक कोई स्तरीय अध्ययन नहीं किया गया है। शोध के मुताबिक इस बात को साबित करने के प्रयास ज्यादातर राजनीति से प्रेरित रहे हैं।
    बाल्टीमोर स्थित जोंस हापकिंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस विषय पर पहले हो चुके 21 अध्ययनों की समीक्षा की। इन अध्ययनों में डेढ़ लाख से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया था। उच्च स्तरीय इन अध्ययनों से साबित होता है कि सामान्य महिलाओं की तुलना में उन महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा जिन्होंने गर्भपात कराया था। प्रमुख शोधकर्ता डा। राबर्ट ब्लूम के मुताबिक सबसे अच्छे शोध इस बात का समर्थन नहीं करते कि गर्भपात के बाद डिप्रेशन के लक्षण उभर आते हैं। कम से कम उस तरह जैसे घाव के बाद तनाव संबंधी विकार पैदा हो जाता है। शोध टीम में शामिल विग्नेट्टा चा‌र्ल्स ने बताया कि अभी तक मिले साक्ष्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि भावात्मक नुकसान को गर्भपात नीति बनाने के दौरान मुद्दा नहीं बनाया जा सकता। यूस सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ अमेरिका में हर साल 12 लाख 29 हजार महिलाएं गर्भपात कराती हैं। दुनिया भर में यह संख्या लगभग 2।5 करोड़ है।
    शोध में कहा गया है कि गर्भपात एक संवेदनशील
    राजनीतिक मुद्दा है जिस पर प्राय: सभी देशों में कानून के आधार पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जाती है। जिसे सही नहीं कहा जा सकता। jagran

    बिपाशा का यंग रोमांस


    मुम्बई.अब वो जमाना लद गया जहां हीरोइन को हीरो से उम्र में छोटा होने पर ज्यादा जोर दिया जाता था। अब तो जो बिकता है उसे हर कीमत पर बेचा जाता है। अब बिपाशा को ही चले लीजिए। मैडम का करियर इन दिनों सफलता के बुलंदियों पर है।

    बिपाशा ने रणबीर कपूर और नील नीतिन मुकेश के साथ पिक्चर साइन की है। दोनों ही बिपाशा के छोटे हैं। रणबीर कपूर के साथ बिपाशा सिद्धार्थ आनंद की 'बचना ए हसीनों 'में नजर आने वाली है वही नील नीतिन मुकेश के साथ उन्होने फ्रीजी नीमक फिल्म साइन की है। इस फिल्म के डाटरेक्टर जहांगीर श्रुति हैं।

    फिल्म के बारे में तो बिपाशा ने कुछ नहीं बताया। बिपाशा ने कहा कि अभी मैंने सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ी है। इस फिल्म के हीरो नील मुझसे 3 साल छोटे है ।

    जब नील से इस बारे में पूछा गया तो वे झेप गए। नील मे कहा कि कोई भी इस बात पर ध्यान नहीं देता कि कौन बड़ा है और कौन छोटा,अगर फिल्म अच्छी हुई तो हर कोई फिल्म देखना चाहेगा।
    Bhaskar

    अमर प्रेम कथाएं

    भारतीय संस्कृति में प्रेम को बेहद पवित्र और अनछुई-सी भावना समझा जाता है। आज हम बेशक वेलेंटाइन डे के रंग में रंगने लगे हों, लेकिन फरवरी में ही आने वाली बसंत पंचमी हमारी संस्कृति में प्रेम दिवस के रूप में ही मनाई जाती है। प्रेम की बात चली है तो कामदेव का िजक्र अनिवार्य है। ब्रह्मा के हृदय से निकले कामदेव प्रेम के देवता हैं। उनकी पत्नियां रति और प्रीति हैं, उनका वाहन तोता है और उनका सहचर बसंत है। अप्सराएं, गंधर्व और किन्नर उनके साथी हैं। कहा जाता है कि शिव के तीसरे नेत्र की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए थे।
    मशहूर प्रेम कथाओं में राधा-कृष्ण, शकुंतला-दुष्यंत, सावित्री-सत्यवान जैसी पौराणिक कथाओं के अलावा रानी रूपमती-बाज बहादुर, सलीम-अनारकली, हीर-रांझा, लैला-मजनूं, सोहनी-महिवाल, ढोला-मारू जैसे प्रेम चरित्रों की गाथाएं अमर हैं।
    राधा-कृष्ण
    सखा भाव पर आधारित राधा-कृष्ण का प्रेम अमर है। कला की हर विधा में इस प्रेम का चित्रण मिलता है। असंख्य गोपियों के संग रास रचाने वाले, रुक्मणि-सत्यभामा के पति और मीरा बाई की भक्ति में रची-पगी रचनाओं के पात्र थे कृष्ण। खुद से बडी उम्र की राधा से उनके प्रेम को सामाजिक मान्यता मिली, यहां तक कि उनका नाम ही राधा के साथ लिया गया। वृषभानु की पुत्री राधा और कृष्ण के इस प्रेम ने कई मायनों में परंपराओं को तोडा था। महाकवि सूरदास के प्रभु, महाभारत में अर्जुन के मार्गदर्शक, राधा के शाश्वत प्रेमी और द्रौपदी की लाज बचाने वाले कृष्ण संभवत: स्त्री-पुरुष समानता के प्रबल पक्षधर भी थे। गोविंद दास, चैतन्य महाप्रभु और गीत गोविंद के रचनाकार जयदेव की रचनाओं में राधा-कृष्ण के इस प्रेम का चित्रण बखूबी मिलता है।

    लैला-मजनूं
    अरबी संस्कृति में दुखांत प्रेम कहानियों की पूरी श्रृंखला है, जिनमें कैस-लुबना, मारवा-अल मजनूं अल फरांसी, अंतरा-अबला, कुथैर-अजा, लैला-मजनूं की कहानियां प्रमुख हैं। लैला-मजनूं की प्रेम कहानी नई नहीं है। अरब के बानी आमिर जनजाति का था यह कवि यानी मजनूं। लैला भी इसी जाति से आती थीं। लैला के पिता के विरोध के कारण इनका विवाह नहीं हो सका और लैला किसी और की पत्नी हो गई। मजनूं पागल हो गए, इसी पागलपन में उन्होंने कई कविताएं रचीं। लैला पति के साथ ईराक चली गई, जहां कुछ ही समय बाद बीमार होकर उनकी मृत्यु हो गई। मजनूं भी कुछ समय बाद मौत की गोद में चले गए।
    अरब और हबीब लोकसाहित्य से लेकर फारसी साहित्य तक यह प्रेम कथा कई रूपों में सामने आई। आम लोग इसे निजामी के पर्सियन संस्करण से ही जानते हैं। कहा जाता है कि रोमियो-जूलियट की कहानी लैला-मजनूं का ही लैटिन संस्करण है।
    सलीम-अनारकली
    मुगल सम्राट अकबर के चहेते और बाबा फरीद के आशीर्वाद से जन्मे बेटे सलीम ने अनारकली से प्रेम किया। अनारकली एक मूर्तिकार की बेटी थी और बेहद सुंदर थी। अकबर इस प्रेम के खिलाफ थे। अनारकली के प्रेम में पागल शाहजादा सलीम ने अपने पिता के खिलाफ बगावत तक कर दी। कहा जाता है कि दरियादिल माने जाने वाले मुगल सम्राट ने अनारकली को जिंदा दीवार में चिनवा दिया गया। मुगले-आजम जैसी फिल्म ने इस प्रेम कथा को अमर कर दिया।
    हीर-रांझा
    पंजाब की धरती पर कई प्रेम कथाओं का जन्म हुआ, जिनमें वारिस शाह रचित हीर को साहित्यिक जगत के लोग बखूबी जानते हैं। अमीर परिवार की खूबसूरत हीर ने प्रेम किया रांझा से। रांझा अपने चार भाइयों में सबसे छोटा था, भाइयों से विवाद के बाद वह घर छोडकर भाग गया और हीर के गांव तक आ पहुंचा। हीर के घर में वह पशुओं की रखवाली करने लगा। दोनों के बीच प्रेम हुआ और कई वर्षो तक दोनों मिलते रहे, लेकिन हीर के ईष्र्यालु चाचा कैदो और माता-पिता के कारण दोनों का विवाह नहीं हो सका, हीर का विवाह अन्यत्र कर दिया गया। रांझा जोगी हो गया और अलख निरंजन कहकर गांव-गांव फिरने लगा। जोगी रूप में एक बार फिर वह हीर से मिला। दोनों भाग गए लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड लिया। लेकिन उसी रात पूरे शहर में आग लग गई। घबराए हुए महाराजा ने प्रेमियों को आजाद कर दिया और उन्हें विवाह की इजाजत दे दी। दोनों हीर के गांव वापस आए, इस बार माता-पिता उनके विवाह पर राजी हो गए। विवाह के दिन हीर के ईष्र्यालु चाचा कैदो ने हीर को विष खिला दिया, रांझा ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की किंतु हीर न बच सकी। हीर के दुख में व्यथित रांझा की भी बाद में मौत हो गई। एक दारुण प्रेम कहानी खत्म हो गई।
    सोहनी-महिवाल
    पंजाब की ही धरती पर उगी एक अन्य प्रेम कथा है सोहनी-महिवाल की। सिंधु नदी के तट पर रहने वाले कुम्हार तुला की बेटी थी सोहनी। वह कुम्हार द्वारा बनाए गए बर्तनों पर सुंदर चित्रकारी करती थी। उजबेकिस्तान स्थित बुखारा का धनी व्यापारी इज्जत बेग व्यापार के सिलसिले में भारत आया, सोहनी से मिलने पर वह उसके सौंदर्य पर आसक्त हो उठा। सोहनी को देखने के लिए वह रोज सोने की मुहरें जेब में भरकर कुम्हार के पास आता और बर्तन खरीदता। सोहनी भी उसकी तरफ आकर्षित हो गई। वह सोहनी के पिता के घर में नौकरी करने लगा, उसका नाम महिवाल पड गया, क्योंकि वह भैंसें चराने लगा। जब उनके प्रेम के किस्से आसपास फैले तो तुला ने सोहनी को बिना बताए उसकी शादी किसी कुम्हार से कर दी। महिवाल अपना घर, देश भूलकर फकीर हो गया। मगर दोनों प्रेमियों ने मिलना न छोडा। रोज जब रात में सारी दुनिया सोती, सोहनी नदी के उस पार महिवाल का इंतजार करती, जो तैरकर उसके पास आता। महिवाल बीमार हुआ तो सोहनी एक पक्के घडे की मदद से तैरकर उससे मिलने पहुंचने लगी। उसकी ननद ने एक बार उन्हें देख लिया तो उसनेपक्के घडे की जगह कच्चा घडा रख दिया। सोहनी घडे द्वारा नदी पार करने लगी तो डूब गई। महिवाल उसे बचाने के लिए नदी में कूदा, वह भी डूब गया। इस तरह यह दुख भरी प्रेम कहानी खत्म हो गई।

    युवाओं को दीवाना बनाती मेंथाल सिगरेट

    सिगरेट निर्माता कंपनियां युवाओं को आकर्षित करने के लिए सिगरेट में मेंथाल के स्तर के साथ छेड़छाड़ करती है। यह बात एक नए अध्ययन से सामने आई है।
    हावर्ड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ [एचएसपीएच] के प्रोफेसर और अध्ययन के सह लेखक होवार्ड कोह ने कहा कि तंबाकू कंपनियां न केवल युवाओं को आकर्षित करने के लिए बल्कि उन्हे अपना आजीवन ग्राहक बनाने के लिए भी मेंथाल के स्तर से छेड़छाड़ करती हैं।
    एचएसपीएच ने अपने अध्ययन के दौरान तंबाकू कंपनियों के मेंथाल संबंधी दस्तावेजों का अध्ययन किया और उनके उत्पादों का प्रयोगशाला में परीक्षण भी किया। कोह ने बताया कि चूंकि मेंथाल सिगरेट की कड़वाहट को कम कर देता है इसलिए युवा आसानी से निकोटीन की अच्छी खासी मात्रा इसके द्वारा अपने अंदर पहुंचा लेते है। यही कारण है कि अचानक बाजार में मेंथाल वाली सिगरेटों की भरमार हो गई है। कोह ने बताया कि युवाओं को अपना ग्राहक बनाने के लिए सिगरेट कंपनियों ने जानबूझ कर यह रणनीति अपनाई है। जागरण

    ..और आज अपनों से कहिए आई लव यू

    उपभोक्तावादी संस्कृति द्वारा पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिए जाने के बाद आज रिश्तों की परिभाषा ही बदल गई है। संबंधों से गर्माहट के साथ ही एक और मीठी सी चीज जो गायब होती जा रही है वह है, प्यार।
    शायद प्यार के इसी सूखते सोते में फिर से हरा करने के लिए ही दुनिया भर में 19 जनवरी का दिन प्रेम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। हालांकि ऐसा नहीं है कि आप केवल 19 जनवरी को ही आई लव यू कह सकते हैं। साल के 365 दिन ऐसे होते हैं जब रिश्तों को प्यार की चुस्की की जरूरत होती है।
    समाजशास्त्रियों की राय में आधुनिक दौड़भाग की जिंदगी में हर रिश्ते में से प्यार मुट्ठी से फिसलती रेत की तरह होता जा रहा है। आज न तो पति-पत्नी के पास और न ही मां बाप और बच्चों के पास इतना समय है कि वे एक दूसरे को गले लगाकर कह सकें मैं आपको प्यार करता हूं। जब कहने की ही फुर्सत नहीं है तो प्यार करने के लम्हे चुराने की कौन कहे।
    पूरी दुनिया में 19 जनवरी को यह दिवस मनाया जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत कब, कहां और कैसे हुई, इसके बारे में कोई अधिकृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इतना जरूर है कि लोग इस दिन अपने प्रियजनों को ग्रीटिंग का‌र्ड्स जरूर भेजते हैं।
    शेल कहती हैं कि परिवार में सभी एक दूसरे को प्यार करते हैं लेकिन कभी कभार प्यार की यह भावना लफ्जों का भी आलिंगन चाहती है। ऐसे में आई लव यू के तीन शब्द रिश्तों की पौध में पानी का सा काम करते हैं और संबंधों में नई जान आ जाती है।
    कुछ लोग शर्मीले स्वभाव के होते हैं तो वे शब्दों का सहारा नहंी ले पाते लेकिन ऐसे लोगों के लिए ही शायद आदम और हौवा ने भावों की भाषा गढ़ी होगी। सबसे बढि़या तरीका है कि फूलों का गुलदस्ता भेजिए और उसमें एक नोट लगा दीजिए आई लव यू का।
    एक प्रतिष्ठित विज्ञापन कंपनी में आर्ट डायरेक्टर रिहालिका कहती हैं कि आप जिसे प्यार करते हैं उसके लिए थोड़ा समय निकालिए। जब वह सोए हुए हों तो अल सुबह ओस की बूंदों से भीगी गुलाब की पंखुडि़यां उनके ऊपर बिखेर दीजिए और एक शानदार नाश्ते से स्वागत कीजिए।
    ऐसा नहीं है कि पति और पत्नी को ही प्यार की जरूरत है, बच्चे भी मां बाप से ऐसी ही उम्मीद लगाते हैं। रिहालिका कहती हैं कि एक क्षण के लिए अपने बच्चे की नाक से अपनी नाक रगड़ कर उसके बालों में हाथ फिरा दीजिए या उसे बांहों में लेकर घूम जाइए। इतना भर करने से उसकी किलकारियों से घर का हर कोना गूंज उठेगा और आप खुद को अपने लाड़ले या लाड़ली के अधिक करीब पाएंगे।
    बच्चों की ही तरह बुजुर्ग भी प्यार के लिए तरसते रहते हैं। उन्हें इन जादुई तीन शब्दों के बजाय उनके अहसास की अधिक जरूरत होती है। इसलिए किसी गुलाबी सी शाम को अपने दादा दादी या नाना नानी का हाथ हल्के से पकडि़ए और फूलों भरे पार्क की बेंच पर बैठकर उनकी गोद में सिर रख दीजिए तो उनके लिए यही आपका आई लव यू है।
    तो ज्यादा सोचिए मत। आज दुनिया को प्यार और अपनेपन की बहुत जरूरत है। इसलिए अभी तक जो नहीं किया या कहा है उसे कर डालिए और धीरे से अपने प्रिय के कान में कहिए आई लव यू। jagran

    Anna Camp, 'Pitch Perfect' Actress, On A Capella, 'The Mindy Project' And Why It's 'Refreshing To See Women Getting Messy'



    Anna Camp is having a big few weeks. The 30-year-old actress, probably best known for her extended guest-starring roles on "True Blood" and "The Good Wife," is being thrust right into the spotlight. She stars as Mindy Kaling's best friend in television show "The Mindy Project" which premiered on September 25th and as a type-A a capella captain in "Pitch Perfect," which opens on October 5th. Camp's character, Aubrey, rules her all-female singing group, The Bellas, with an iron fist and an Ace of Base tune in a quest for a national championship. She spends much of the film attempting to force newcomers Becca (Anna Kendrick) and Fat Amy (Rebel Wilson) to tow the party line. Camp spoke with The Huffington Post about the major release her character gets, working with Mindy Kaling and why it's so exciting to be a woman in the entertainment industry right now.

    Obviously, “Pitch Perfect” is all about the a capella. Did you ever do a capella before this movie?
    You know, I never did. It’s a lot harder than it looks! It takes a lot of practice.

    Your character in "Pitch Perfect," Aubrey, is very buttoned-up and uptight on the surface, but sort of boiling underneath, and I’d say the same thing about your role as Sarah Newlin on "True Blood." Is that a type of part that you're drawn to?
    Well, I’m from the South originally. I grew up in South Carolina definitely learning about manners and being proper and having to go to cotillions. I think once I graduated school, I was desperate to break out of that. But I think there’s that [instinct] inside of me, and that’s how I can have access to these types of women. And I just like playing [these type of characters]. I feel like they have so much going on underneath the surface that they don’t show, and as an actor it’s such a great challenge to suppress things and to play with that inner battle.

    And I feel like for women particularly, there’s always kind of a pressure to push things down.
    Yeah it’s that [sense of] wanting to be crazy and wild but having society’s expectations over your head. [It’s] that fight, that inner struggle that’s been going on for years with women. And I think that really well-written characters [like that] are especially interesting to watch and fun to play.

    Aubrey is such an extreme character. Do you feel like she’s someone that women will relate to?
    I do. I know she’s extreme and that she desperately wants to be perfect. But I think there’s a bit of that in everyone, even men. Aubrey’s identity is her success in this a capella world. [She] takes it to the next level, of course, because she’s consumed by it, but I think people can relate to wanting to be successful and being afraid of not being perfect at all times. I know I can relate to that.

    So, there's a scene toward the end of the film (and one toward the beginning) where your character projectile vomits. When you saw that scene in the script what was your initial reaction?
    When I read the first throw-up scene I was like, “This is awesome, I have to do this. I don’t want anyone else to do that.” And then I got to the final throw-up scene and I thought, “This is crazy. How are they gonna do this? Am I really gonna throw up? Are we gonna CGI this whole thing? Like, how is this going down?” But I just love that [Aubrey] gets that release -- literally and emotionally. Getting to just go crazy after being held so tightly the whole film was awesome.

    You're also in "The Mindy Project." How has it been working with Mindy Kaling, your co-star and the brains behind the show?
    It’s been great. This is her passion project. She’s so invested in [the show] and the cast and in making it a really collaborative process.

    Kanye West Sued For Sampling Songs On 'My Beautiful Dark Twisted Fantasy'

    A New York label is suing Kanye West, claiming the Grammy-winning rapper illegally used portions of a 1969 song by New Orleans legend Eddie Bo on his No. 1 2010 album "My Beautiful Dark Twisted Fantasy," according to The Hollywood Reporter.

    In its complaint, TufAmerica says two tracks on "My Beautiful Dark Twisted Fantasy" -- "Who Will Survive in America?" and "Lost in the World" -- include a bit of "Hook and Sling, Part 1" by Eddie Bo, which TufAmerica says it bought the rights to more than 15 years ago.

    TufAmerica claims West's label Roc-A-Fella paid a license fee of $62,500, but "failed and refused to enter into written license agreements that accounted for their multiple other uses of ['Hook and Sling']." The label is seeking undisclosed damages for copyright infringement.

    In 2010, Kanye West was sued by musician Vincent Peters over a copyright dispute regarding similarities between West's "Stronger" and a song Peters had sent West's business associate in 2006. West's legal counsel referenced the works of philosopher Friedrich Nietzsche, whose maxim "that which does not kill us makes us stronger" is quoted in the song, and the court ruled in the rappers' favor.

    TufAmerica is the same label that filed a copyright-infringement lawsuit against the Beastie Boys earlier this year, the day before band member Adam Yauch died of cancer. That lawsuit claimed the Beasties' 1980s albums "License to Ill" and "Paul's Boutiquet" illicitly sampled from two Trouble Funk songs TufAmerica administers.

    Jared Followill, Kings Of Leon Bassist, Marries Model Martha Patterson

    Kings of Leon bassist Jared Followill and model Martha Patterson have tied the knot.

    The couple married Saturday evening during a ceremony with friends and family at Front Porch Farms about 40 miles outside Nashville.

    The marriage means all four members of the Followill family band are off the market. Older brothers Nathan and Caleb and cousin Matthew have already started families.

    The 25-year-old Followill and 21-year-old Patterson were engaged last spring. Patterson wore a white dress with lace bodice and flowing feathered skirt by Monique Lhuillier and Followill wore black Gucci.

    Patterson said in a Tweet earlier Saturday she's "marrying my best friend." Followill quipped that he's "dreamed about this day since I was a little girl."

    Hong Kong Billionaire Offers $64 Million for Man Who Will Marry His Daughter

    Hong Kong real estate tycoon Cecil Chao Sze-tsung has offered a bounty of almost $65 million for any man who will woo and marry his 33-year-old daughter Gigi Chao. Since then, offers to take Gigi’s hand in marriage have been pouring forth from all over the globe. There’s just one slight problem: Gigi’s already taken.

    According to reports, the announcement came on the heels of Gigi Chao’s nuptials to her longtime girlfriend, Sean Yeung, in April. The two reportedly were married in Paris and not in Hong Kong, where gay rights are limited.


    In a recent South China Morning Post article, the tycoon’s daughter criticized the territory’s conservative views toward homosexuality, saying that it lagged behind the U.S. and even mainland China. (Homosexuality was officially decriminalized in Hong Kong in 1991, but same-sex unions are still not recognized.)

    In an interview with the Telegraph, Gigi said she understood the reasons behind her father’s actions. “It’s not that he can’t accept me,” she told the newspaper. “It’s that he can’t accept how society would view me and the status that it would incur. Marriage is still a form of social status. I do understand him. I understand why he’s doing this.”


    Her father, meanwhile, has not publicly acknowledged his daughter’s marriage. As he told the Post:

        I do not mind whether [the man who marries Gigi] is rich or poor. The important thing is that he is generous and kindhearted. Gigi is a very good woman with both talents and looks. She is devoted to her parents, is generous and does volunteer work.

    Gigi, who was initially amused by the monetary offer, told the Telegraph she appreciated the gesture. “At first I was entertained by it, and then that entertainment turned into the realization and conviction that I am a really lucky girl to have such a loving daddy, because it’s really sweet of him to do something like this as an expression of his fatherly love.”

    Total Pageviews